गाथा घूंघट की

गाथा घूंघट की
गाथा घूंघट की

गाथा घूंघट की

 

रित रिबाजकी रंग में

रंगबेरंगा साडीकी चिकन

जब पहलीबार सरकी बनता आभरण

तब एक बेटिका बढ्जाता रूप लाबन्य

साथे लाता जिम्मेदारी अगणन II

 

रिस्तेमें आजाता नयापन

नया आबेग जिज्न्यासा का इच्छा

लाता अपनिआप अकथन

कभी अबांतर प्रश्न हिल्लोलित करता तन II

 

कभी कभी असमझ रहता मन

आखिर किसलिए घूंघट बनारहता ढंकन ?

खामुसिमें बनाता दायित्वबान

कभी बनता घरकी रानी तो फिर सान II

 

घूंघट की निचे जोहे एक चांदकी मुखुडा

सायद बनसकता दुष्ट बेईमान

मगर घूंघट की परछाई में

जरुर लुक्कायित होगी कोई गुण महान II

 

ये घूंघट कभी बन् नहीं सकता साधारण

 संस्कृतिका  बड़ा एक अनुसंधान

जो जिम्मेदारी और संपर्क का सहद चखाकर

किसी में बनाता सुश्रुन्खलित एक कामयाब जीबन II

 

गाथा घूंघट की

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